विदेश से मिला ₹730 करोड़ का ऑर्डर Engineering Stock को, इसमें राष्ट्रपति ने भी लगाए हैं पैसे

Sumit Patel

क्या आप स्टॉक मार्केट में छुपे हीरों की तलाश में हैं? इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) एक ऐसा सरकारी उद्यम (PSU) है, जिसने हाल ही में मिडिल ईस्ट से बड़े ठेके हासिल किए हैं। आइए, इस कंपनी के फंडामेंटल्स और ग्रोथ पोटेंशियल को समझते हैं।

President Invested Stock Got 730cr Foreign Order

EIL को ₹730 करोड़ के नए ठेके

EIL ने मिडिल ईस्ट के दो अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) और इंजीनियरिंग एंड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सर्विसेज के लिए ठेके प्राप्त किए हैं:

  1. ₹650 करोड़ का PMC सेवा ठेका – 5 साल में पूरा होगा।
  2. ₹80 करोड़ का इंजीनियरिंग एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट ठेका – 4 साल की अवधि।

ये ठेके EIL की ग्लोबल पहुंच को मजबूत करते हैं, खासकर तेल एवं गैस सेक्टर में। कंपनी का इंजीनियरिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट में दशकों का अनुभव है, जो भविष्य में और ऑर्डर की संभावना को बढ़ाता है।

फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

तिमाही नतीजे (दिसंबर 2024)

  • रेवेन्यू: ₹764.59 करोड़ (पिछले साल से 11.88% कम)
  • ऑपरेटिंग प्रॉफिट: ₹97.90 करोड़ (पिछले साल से 95.53% अधिक)
  • शुद्ध लाभ (PAT): ₹108.73 करोड़ (पिछले साल से 71.63% अधिक)

हालांकि रेवेन्यू में गिरावट आई है, लेकिन प्रॉफिट मार्जिन में भारी बढ़ोतरी दिखाती है कि कंपनी ने खर्चों को कुशलतापूर्वक नियंत्रित किया है।

वार्षिक प्रदर्शन (FY24)

  • रेवेन्यू: ₹3,280.86 करोड़ (पिछले साल से 1.48% कम)
  • शुद्ध लाभ: ₹445.26 करोड़ (पिछले साल से 28.59% अधिक)

रेवेन्यू स्थिर रहने के बावजूद, शुद्ध लाभ में वृद्धि से पता चलता है कि EIL ने अपनी दक्षता बढ़ाई है।

मूल्यांकन (Valuation)

  • P/E अनुपात: 22.2 (इंडस्ट्री P/E: 32.2) → क्या यह अंडरवैल्यूड है?
  • ROCE: 22.2% (पूंजी का कुशल उपयोग)
  • ROE: 20.8% (शेयरहोल्डर्स के लिए अच्छा रिटर्न)

EIL का P/E अनुपात इंडस्ट्री औसत से कम है, जो इसे एक आकर्षक निवेश बना सकता है।

EIL के मजबूत और कमजोर पक्ष

मजबूत पक्ष (Strengths)

सरकारी समर्थन: EIL भारत सरकार के अधीन एक PSU है (पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत)।
वैश्विक विस्तार: मिडिल ईस्ट में नए ठेकों से रेवेन्यू डायवर्सिफिकेशन होगा।
लाभ में वृद्धि: खर्चों में कटौती और ऑपरेशनल दक्षता ने मुनाफे को बढ़ाया है।
आकर्षक वैल्यूएशन: P/E अनुपात इंडस्ट्री से कम है।

कमजोरियाँ (Risks)

रेवेन्यू में गिरावट: पिछले कुछ तिमाहियों से रेवेन्यू स्थिर या घटा है।
तेल एवं गैस सेक्टर पर निर्भरता: अगर वैश्विक तेल मांग कम होती है, तो EIL के प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं।

निष्कर्ष

अगर आप लॉन्ग-टर्म निवेशक हैं और सरकारी उद्यमों (PSU) में विश्वास रखते हैं, तो EIL एक अच्छा विकल्प हो सकता है। कंपनी का मजबूत ऑर्डर बुक, बेहतर होता मुनाफा और उचित वैल्यूएशन इसे भविष्य में एक बेहतर परफॉर्मर बना सकते हैं। हालांकि, शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को मार्केट वॉलैटिलिटी का ध्यान रखना चाहिए। यह निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले अपना शोध अवश्य करें।

Disclaimer: ऊपर दिए गए विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं, न किDr NiveshIt" की। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श करें। निवेश में जोखिम होता है और सही जानकारी के बिना निर्णय लेना हानिकारक हो सकता है।

   
           
   
               
           

मेरा नाम सुमित पटेल है, मैं आर्टिकल राइटिंग के क्षेत्र में पिछले 2 सालों से कार्यरत हूं। शेयर मार्केट के साथ ही साथ मैं टेक, रोजगार और बिजनेस से जुड़ी जानकारी भी रखता हूं। अगर आपको मेरे द्वारा लिखे गए लेख पसंद आते हैं या फिर कोई त्रुटि नजर आती है, तो कमेंट करके हमें उसकी जानकारी जरूर दें। धन्यवाद!

    

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